बहू के माता पिता को भी सम्मान पाने का हक है।

अरे क्या बंदिता जी आप अपने इतने स्मार्ट बेटे के लिए यही साबली बहू ले आई, कितने अच्छे और बड़े बड़े घर से कितनी खूबसूरत लड़कियों का रिश्ता आया आकाश के लिए तब आपने शादी नहीं की ,और अब आपने क्या देख कर इस लड़की से अपने बेटे की शादी कर दी।। शादी में आए रिश्तेदार सब मुंह दिखाई के वक्त रूपाली को देखते ही बंदिता जी से बोली ।।

कितनी प्यारी तो है मेरी बहू,बरी बरी आँखे तीखे नाक नक्श शाबला बर्ण देख कर लगता है, मानो सुबह की पहली किरण हो।।सबसे सुंदर है मेरी बहू का मोहक मुस्कान और उसका सरल व्यबहार जिसे देखते ही मैं और वैभव जी इसपर मोहित हो गए।और हमने निर्णय लिया कि रूपाली ही मेरी बहू बनेगी।। बंदिता जी बोली तो सभी चुप हो गई।।और रूपाली भरी आंखों से अपनी सासू माँ को देखने लगी।

तभी बंदिता जी ने अपने हाथो से कंगन उतार कर रूपाली को पहनाते हुए ढेरों आशीर्वाद देने लगी।।और बोली चलो बहू तुम थक गई होगी अब आराम कर लो।और प्यार से ले जाकर रूपाली को उसके रूम तक छोड़ आई।।माम्मी जी आप बहुत अच्छी हो रूपाली बंदिता जी को देखते हुए बोली ।।तुम आराम करो बहू मै जाकर मेहमानों को देखती हूं मुस्कुराते हुए बंदिता जी रूपाली के सिर पर प्यार से हाथ रखते हुए बोली।।और चली गई।।

और रूपाली अपने रूम में बैठ कर आकाश का इंतजार करने लगी।।कुछ ही देर में आकाश आया और सहज भाव से रूपाली से बात करने लगा ।रूपाली घबरा रही थी।।देखिए ये आपके लिए है कहते हुए आकाश ने एक सुंदर सा डायमंड का नेकलेस रूपाली को दिया।।और पूछा आपको पसंद है न।।जी बहुत सुंदर है रूपाली आकाश को देखते हुए बोली।।

आप अगर पहन लेंगी तो ये और भी खूबसूरत लगेगी मुस्कुरा कर आकाश रूपाली से बोला तो रूपाली शर्म से लाल हो गई।और उसकी पलके झुक गई।।आकाश ने बड़े प्यार से रूपाली को नेकलेस पहनाया।।अब धीरे-धीरे रूपाली सहज होने लगी।। चलिए सो जाइए सुबह जल्दी उठना है।आकाश रूपाली से बोला और दोनों सो गए।।

सुबह जब रूपाली रेड और क्रीम कलर की कॉम्बिनेशन  बाली साडी पहन ,कर, हाथों में चुरा,और मांग में लाल सिंदूर लगा कर ,तैयार हुई तो बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा सी सुंदर दिख रही थी।। बंदिता जी उसे मंत्र मुग्ध सी देखती रह गई।।और साथ ले जाकर बाकी रस्में पूरी करबाने लगी।।

दो दिन बाद रूपाली और आकाश की रिसेप्शन पार्टी रखी गई।।उसमे सभी रिश्तेदारों को बुलाया गया।।रूपाली के मायके से भी सभी को बुलाया गया।। बंदिता जी और वैभव जी बरे सम्मान के साथ सभी रिश्तेदारों के साथ अपने समधी समधन का परिचय करवा रहे थे।।

आकाश के साथ खड़ी रूपाली ये सब मंत्र मुग्ध होकर देख रही थीं।और सोच रही हूं सचमुच सपनों से भी सुंदर ससुराल मिला है हमें।।

अरे भाभी जी कहा खो गई आप आकाश के एक दोस्त ने कहा तो रूपाली शरमाते हुए बोली जी कही नहीं।।तो वहां मौजूद आकाश के दोस्त सब हसने लगे।।

बरे सम्मान के साथ रिसेप्शन के बाद रूपाली के माता-पिता (काबेरी जी और कमल जी)को बंदिता जी और वैभव जी ने  बीदा किया।। तो उन दोनों ने हाथ जोड़कर उन्हें धन्यवाद कहा।।आप लोगो ने जितना सम्मान हमें दिया उसके लिए हम हमेशा आपके आभारी रहेंगे।एकसाथ काबेरी जी और कमल जी बंदिता जी और वैभव जी से हाथ जोड़ते हुए बोले।।आप हाथ मत जोड़िये बहू के माता पिता को भी सम्मान पाने का हक होता है।। बंदिता जी बोली ।।तो रूपाली के माता पिता खुशी खुशी अपने घर चले गए।।और रूपाली अपने ससुराल में सुखपूर्वक रहने लगी।

One Response

  1. wap.google.com August 21, 2020

Leave a Reply